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Shayari
"आँसू होते नहीं बहाने के लिए,

ग़म होते हैं पी जाने के लिए,

मत सोचना किसी को पाने के लिए,

वरना जिंदगी कम पड़ जाएगी,
उसको भुलाने के लिए।
♥♥♥♥"
— unknown
Shayari
"♥♥♥♥
ज़िक्र करता है दिल सुबह शाम तेरा, 

गिरते हैं आँसू बनता है नाम तेरा, 

किसी और को क्यों देखे ये आँखें, 

जब दिल पे लिखा सिर्फ नाम तेरा।
♥♥♥♥"
— unknown
Shayari
"उदासी का ये पत्थर आँसुओं से नम नहीं होता, 
हजारों जुगनुओं से भी अँधेरा कम नहीं होता। 

बिछड़ते वक़्त कोई बदगुमानी दिल में आ जाती, 
उसे भी ग़म नहीं होता मुझे भी ग़म नहीं होता। 

ये आँसू हैं इन्हें फूलों में शबनम की तरह रखना, 
ग़ज़ल एहसास है एहसास का मातम नहीं होता। 

बहुत से लोग दिल को इस तरह महफूज़ रखते हैं, 
कोई बारिश हो ये कागज़ जरा भी नम नहीं होता। 

कभी बरसात में शादाब बेलें सूख जाती है, 
हरे पेड़ों के गिरने का कोई मौसम नहीं होता।
♥♥♥♥♥"
— unknown
Shayari
"*दिल परेशान बहुत है* .. .

ज़िन्दगी की कशमकश से परेशान बहुत है,
दिल को न उलझाओ ये नादान बहुत है।

यूं सामने आ जाने पर कतरा के गुजरना,
वादे से मुकर जाना उसे आसान बहुत है।

यादें भी हैं, तल्खी भी है, और है मोहब्बत,
तू ने जो दिया दर्द का सामान बहुत है।

अश्क कभी, लहू कभी, आँख से बरसे,
बेदाग़ मोहब्बत का ये अंजाम बहुत है।

तूने तो सुना होगा मेरे दिल का धड़कना,
छूकर भी देख लेना ये बेजान बहुत है।

बहुत तड़प लिए अब उससे बिछड़ कर,
पा जाएँ खोने वाले को अरमान बहुत है।
👍👍👍👍"
— unknown
Shayari
"इंसानियत तो एक है मजहब अनेक है

ये ज़िन्दगी इसको जीने के मक़सद अनेक है

 

ना खाई ठोकरे वो रह गया नाकाम 

ठोकरे खाकर सँभलने वाले अनेक हैं 

 

ना महलों में ख़ामोशी ना फूटपाथ पर 

क़ब्रिस्तान में ख़ामोशी से लेटे अनेक है 

 

बहुत चीख़ती है मेरे दिल की ख़ामोशी तन्हाई में 

ख़ामोशी अच्छी है कहते अनेक है 

 

रोये थे कभी उसकी याद में अकेले बैठकर 

आँखे मेरी लाल है कहते अनेक है 

👍👍👍👍"
— unknown
Shayari
"में तेरे शहर में आया हू , खुद की महफ़िल सजाने आया हू

तेरे इश्क की इस आंधी में ,खुद को फिर मिटाने आया हू .

 

में भी तेरा दीवाना हू ,बस यही बात बताने आया हू

तेरे इश्क की मासूमियत में ,खुद को फिर लुटाने आया हू .

 

मैं भी कितना बांवरा हू ,यह तुझे जताने आया हू

तेरे इश्क के शहर में ,खुद की प्यास बुझाने आया हू .

 

तुम मेरी हो – तुम मेरी हो ,बस यही तुम्हें कहने आया हू

तेरे इश्क के शहर में ,खुद की महफ़िल सजाने आया हू

👍👍👍👍"
— unknown