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Suvichar
"👉कुछ "रिश्ते"..."किराए" के..."मकान" जैसे होते हैं.....
:
"उन्हें" कितना भी..."सजालो पर...वो कभी "अपने" नही होते.....💔

👉दरारे अपनों मे
इस कदर न पड़ने देना

के मरम्मत में
गैरो की ज़रूरत पड़ जाएं
👍🏻👍🏻👍🏻"
— unknown
Suvichar
"🌸🌸🌸🌸 🌸🌸🌸🌸
*“नहीं”और “हाँ” यह दो छोटे शब्द हैं*
*लेकिन* ……… *उनके लिये बहुत सोचना पड़ता है…*

*हम जिन्दगी में बहुत सी चीजों को खो देते हैं…,“नहीं” जल्दबाजी में बोलने पर और… “हाँ” देर से बोलने पर…*
"
— unknown
Suvichar
"👉🏻आपकी खुशियों 🙂 में वो लोग
शामिल होते है जिन्हें आप चाहते💝 है,

लेकिन आपके दुःख 🙁 में वो लोग
शामिल होते है जो आपको चाहते 💝 है ‼"
— unknown
Suvichar
"शिकायत छोड़िए
शुक्रिया अदा
कीजिए !

आपके पास जितना है,
न जाने कितनों के पास
उतना भी नहीं  !!
👌👌👌

"
— unknown
Suvichar
"✴ लाइन छोटी है,पर मतलब बहुत बड़ा है ~

उम्र भर उठाया बोझ उस कील ने ...

और लोग तारीफ़ तस्वीर की करते रहे ..
〰〰〰〰〰〰
✴ पायल हज़ारो रूपये में आती है, पर पैरो में पहनी जाती है

और.....

बिंदी 1 रूपये में आती है मगर माथे पर सजाई जाती है

इसलिए कीमत मायने नहीं रखती उसका कृत्य मायने रखता हैं.
〰〰〰〰〰〰
✴ एक किताबघर में पड़ी गीता और कुरान आपस में कभी नहीं लड़ते,

और

जो उनके लिए लड़ते हैं वो कभी उन दोनों को नहीं पढ़ते....
〰〰〰〰〰〰〰〰
✴ नमक की तरह कड़वा ज्ञान देने वाला ही सच्चा मित्र होता है,

मिठी बात करने वाले तो चापलुस भी होते है।

इतिहास गवाह है की आज तक कभी नमक में कीड़े नहीं पड़े।

और मिठाई में तो अक़्सर कीड़े पड़ जाया करते है...
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✴ अच्छे मार्ग पर कोई व्यक्ति नही जाता पर बुरे मार्ग पर सभी जाते है......

इसीलिये दारू बेचने वाला कहीं नही जाता ,

पर दूध बेचने वाले को घर-घर
गली -गली , कोने- कोने जाना पड़ता है ।
〰〰〰〰〰〰〰〰

✴ दूध वाले से बार -बार पूछा जाता है कि पानी तो नही डाला ?

पर दारू मे खुद हाथो से पानी मिला-मिला कर पीते है ।
〰〰〰
✴ वाह रे दुनिया और ��ुनिया की रीत ।"
— unknown
Suvichar
"👉क्या खूब लिखा है लिखने वाले ने
आगे सफर था और पीछे हमसफर था..
रूकते तो सफर छूट जाता और चलते तो हमसफर छूट जाता..

मंजिल की भी हसरत थी
और उनसे भी मोहब्बत थी..
ए दिल तू ही बता,उस वक्त मैं कहाँ जाता...
मुद्दत का सफर भी था और बरसो
का हमसफर भी था
रूकते तो बिछड जाते और चलते तो बिखर जाते....

यूँ समँझ लो,
प्यास लगी थी गजब की...
मगर पानी मे जहर था...
पीते तो मर जाते और ना पीते तो
भी मर जाते.

बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल
हुए!!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल
हुए!!!

वक़्त ने कहा.....काश थोड़ा और सब्र होता!!!
सब्र ने कहा....काश थोड़ा और वक़्त होता!!!

सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब...।।
आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।।

"हुनर" सड़कों पर तमाशा करता है और "किस्मत" महलों में राज करती है!!

"शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,
पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने,
वो भी बहुतो को नसीब नहीं
होता"..

अजीब सौदागर है ये वक़्त भी!!!!
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया....
अब अमीरी का लालच दे के
जवानी ले जाएगा. ......

लौट आता हूँ वापस घर की तरफ... हर रोज़ थका-
हारा,
आज तक समझ नहीं आया की
जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए
जीता हूँ।

बचपन में सबसे अधिक बार पूछा गया सवाल -
"बङे हो कर क्या बनना है ?"
जवाब अब मिला है, - "फिर से बच्चा बनना है.

“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ
जिन्दगी
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे...!!”

दोस्तों से बिछड़ कर यह हकीकत
खुली...
बेशक, कमीने थे पर रौनक उन्ही से थी!!

भरी जेब ने ' दुनिया ' की पहेचान करवाई
और खाली जेब ने ' अपनो ' की.

जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आया,
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती
है। ...!!!

हंसने की इच्छा ना हो...
तो भी हसना पड़ता है...
.
कोई जब पूछे कैसे हो...??
तो मजे में हूँ कहना पड़ता है...
.
ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों....
यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.

"माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं
पड़ती...
यहाँ आदमी आदमी से जलता है...!!"

दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट,
ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर
जीवन है या नहीं,
पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा
कि जीवन में मंगल है या नहीं।
👍👍👍👍👍👍
अच्छा लगे तो share करना"
— unknown