Shayari
"ख़ुद से ख़ुद का वादा हूँ मैं,
मनमौजी हूँ राजा हूँ मैं.
साथ समंदर के रहता हूँ,
ये ना समझ के प्यासा हूँ मैं.
सदियों मुझमें दर्द रहा है,
ज़ख़्म मगर इक ताज़ा हूँ मैं.
डर मत, खोल मुझे हौले से,
जन्नत का दरवाज़ा हूँ मैं.
दिखता मैं, दिखलाता वो है,
कितना अजब तमाशा हूँ मैं.
मैं ज़मीन हूँ, आसमान हूँ,
ना कम हूँ, ना ज्य़ादा हूँ मैं.
♥♥♥♥♥
~ सुखविंदर
♥♥♥♥♥"