Shayari
"नजरें 👀तुम👰 को ही👍 देखना👀 चाहें 😍
तो मेरी 🕵आँखों👀 का क्या 🤔कसूर 😜है ✔
खुशबू 👃तुम्हारी 👰ही आए
तो मेरी🕵 साँसो🗣 का क्या🤔 कसूर 😲है ✔
वैसे🤔 तो सपने😴 पूछ 👎कर नहीं❎ आते ✔
सपने 😴ही तुम्हारी👰 आए😍 तो मेरी🕵 रातों🌃 का क्या 🤔कसूर 😄है ✔"